ब्रह्मांड और सौरमंडल (UPSC नोट्स ) कॉस्मोलॉजी से लेकर खगोलीय पिंडों तक का विस्तृत अध्ययन

Holash kumar

ब्रह्मांड और सौरमंडल (UPSC नोट्स)

कॉस्मोलॉजी से लेकर खगोलीय पिंडों तक का विस्तृत अध्ययन

खंड 1: ब्रह्मांड की उत्पत्ति और मौलिक भौतिकी (Cosmology & Fundamental Physics)

Cosmology

ब्रह्मांड के अध्ययन को कॉस्मोलॉजी कहते हैं। इसकी उत्पत्ति और विकास को समझने के लिए हमें समय में पीछे जाना होता है।

1. बिग बैंग सिद्धांत (Big Bang Theory - विस्तार का नियम):

  • अवधारणा: बेल्जियम के खगोलविद जॉर्ज लेमेन्टर ने बताया कि लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व ब्रह्मांड एक अत्यंत सघन और गर्म बिंदु (Singularity) में सिमटा हुआ था। इसमें एक महाविस्फोट हुआ और तब से ब्रह्मांड का विस्तार (Expansion) हो रहा है।
  • साक्ष्य (Proof): एडविन हबल ने देखा कि आकाशगंगाएँ (Galaxies) एक-दूसरे से दूर जा रही हैं (Red Shift)।
  • गॉड पार्टिकल (Higgs Boson): यह वह सब-एटॉमिक पार्टिकल है जो अन्य कणों को 'द्रव्यमान' (Mass) प्रदान करता है। सर्न (CERN) की प्रयोगशाला में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) के जरिए इसकी पुष्टि की गई थी। यूपीएससी के लिए यह समझना जरूरी है कि बिना हिग्स बोसोन के, परमाणुओं का निर्माण संभव नहीं था।

2. तारों का जीवन चक्र (Stellar Evolution):

तारे का जीवन उसके द्रव्यमान (Mass) पर निर्भर करता है।

  • जन्म: निहारिका (Nebula - गैस और धूल के बादल) में गुरुत्वाकर्षण संकुचन से तारे का जन्म होता है।
  • ऊर्जा का स्रोत: तारे के केंद्र में नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) होता है, जहाँ हाइड्रोजन (H), हीलियम (He) में बदलता है। जब तक यह प्रक्रिया चलती है, तारा स्थिर रहता है (जैसे हमारा सूर्य)।
  • मृत्यु (The Death of a Star): जब ईंधन खत्म होने लगता है, तो तारा फैलता है और 'लाल दानव' (Red Giant) बन जाता है। इसके बाद उसका अंत 'चंद्रशेखर सीमा' (Chandrasekhar Limit - 1.4 सौर द्रव्यमान) पर निर्भर करता है:
    • छोटे तारे (< 1.4 MS): अपनी बाहरी परतें त्यागकर 'श्वेत वामन' (White Dwarf) बनते हैं। इसे 'जीवाश्म तारा' भी कहते हैं। अंततः यह ठंडा होकर 'काला वामन' (Black Dwarf) बन जाता है।
    • बड़े तारे (> 1.4 MS): इनमें एक भीषण विस्फोट होता है जिसे 'सुपरनोवा' कहते हैं।
      • विस्फोट के बाद बचा हुआ घना भाग न्यूट्रॉन तारा (Pulsar) बन जाता है।
      • यदि तारा बहुत विशाल है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल हो जाता है कि प्रकाश भी बाहर नहीं जा पाता—इसे ब्लैक होल (कृष्ण विवर) कहते हैं।

खंड 2: सौरमंडल की संरचना (Structure of the Solar System)

Structure

हमारा सौरमंडल मंदाकिनी (Milky Way) आकाशगंगा के 'ओरियन आर्म' में स्थित है।

1. सूर्य (The Sun):

  • संरचना: सूर्य गैस का एक गोला है (71% हाइड्रोजन, 26.5% हीलियम)।
  • फोटोस्फेयर (Photosphere): यह सूर्य की वह सतह है जिसे हम अपनी आँखों से देखते हैं। इसका तापमान ~6000°C होता है।
  • सौर कलंक (Sunspots): ये फोटोस्फेयर पर काले धब्बे होते हैं जहाँ तापमान आसपास से कम (~1500°C) होता है। ये चुंबकीय तूफान (Magnetic Storms) पैदा करते हैं जो पृथ्वी के आयनमंडल (Ionosphere) और संचार व्यवस्था (Communication) को बाधित कर सकते हैं।
  • कोरोना (Corona): सूर्य का बाहरी वातावरण जो केवल पूर्ण सूर्यग्रहण के समय दिखता है।

2. ग्रहों का वर्गीकरण (Classification):

यूपीएससी में यह प्रश्न अक्सर कथन (Statement) के रूप में आता है:

  • आंतरिक/पार्थिव ग्रह (Terrestrial Planets): बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल।
    विशेषता: ये सूर्य के निकट हैं, चट्टानों और धातुओं से बने हैं, इनका घनत्व अधिक है और वायुमंडल पतला है। (सूर्य की गर्मी और सौर हवाओं ने इनकी गैसों को उड़ा दिया)।
  • बाह्य/जोवियन ग्रह (Jovian Planets): बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
    विशेषता: ये सूर्य से दूर हैं, हाइड्रोजन-हीलियम जैसी गैसों से बने हैं, आकार में विशाल हैं और इनका घनत्व कम है।

खंड 3: ग्रहों का विस्तृत विश्लेषण (Planetary Analysis)

Analysis

1. बुध (Mercury):

  • वायुमंडल का अभाव: यहाँ वायुमंडल न के बराबर है, इसलिए यह ऊष्मा को रोक नहीं पाता। परिणामतः दिन में भीषण गर्मी (+430°C) और रात में भीषण ठंड (-180°C) होती है। सर्वाधिक तापांतर (Diurnal Range of Temperature) इसी ग्रह पर है।

2. शुक्र (Venus) - "Veiled Planet":

  • ग्रीनहाउस प्रभाव का चरम उदाहरण: शुक्र पर 95% कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) है। यह सूर्य की ऊष्मा को आने तो देता है लेकिन वापस नहीं जाने देता। इसे 'प्रेशर कुकर दशा' कहते हैं। इसी कारण यह बुध से दूर होने के बावजूद सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है।
  • घूर्णन: यह अन्य ग्रहों के विपरीत (Clockwise) घूमता है, यानी यहाँ सूर्योदय पश्चिम में होता है।

3. पृथ्वी (Earth):

  • गोल्डीलॉक्स जोन (Goldilocks Zone): पृथ्वी सूर्य से इतनी दूरी पर है जहाँ न तो पानी जमता है और न ही उबलता है। यह जीवन के लिए आदर्श स्थिति है।
  • झुकाव: अपने अक्ष पर 23.5° झुकी होने के कारण यहाँ ऋतु परिवर्तन (Seasons) होते हैं।

4. मंगल (Mars):

  • जीवन की संभावना: इसकी घूर्णन अवधि (24.6 घंटे) और अक्षीय झुकाव (25°) पृथ्वी के लगभग समान है, जिससे यहाँ भी ऋतुएँ होती हैं।
  • धरातल: यहाँ आयरन ऑक्साइड की अधिकता (लाल रंग) है। सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी 'ओलिंपस मॉन्स' (Olympus Mons) यहीं है, जो एवरेस्ट से तीन गुना ऊँचा है।

5. बृहस्पति (Jupiter):

  • लघु सौरतंत्र: इसके पास इतने उपग्रह (जैसे गैनीमीड, यूरोपा, कैलिस्टो) और इतना द्रव्यमान है कि इसे अक्सर एक 'तारा बनने में असफल' पिंड या 'लघु सौरतंत्र' कहा जाता है।
  • ग्रेट रेड स्पॉट: यह एक विशालकाय प्रति-चक्रवातीय तूफान है जो सदियों से चल रहा है।

6. शनि (Saturn):

  • वलय (Rings): इसके चारों ओर बर्फ और चट्टानों के 7 मुख्य वलय हैं।
  • टाइटन (Titan): शनि का सबसे बड़ा उपग्रह, जहाँ पृथ्वी की तरह सघन वायुमंडल और नाइट्रोजन मौजूद है। यहाँ मीथेन की नदियाँ बहती हैं।

7. अरुण (Uranus) और वरुण (Neptune):

  • अरुण को 'लेटा हुआ ग्रह' (Rolling Planet) कहते हैं क्योंकि यह अपनी धुरी पर 98° झुका हुआ है।
  • इन दोनों को 'बर्फ दानव' (Ice Giants) कहा जाता है क्योंकि इनमें मीथेन की अधिकता है, जो इन्हें नीला-हरा रंग देती है।

खंड 4: चंद्रमा और खगोलीय घटनाएं (Moon & Mechanics)

Mechanics

1. चंद्रमा की कलाएं (Phases):

  • चूँकि चंद्रमा की अपनी रोशनी नहीं है, हम केवल सूर्य द्वारा प्रकाशित भाग को देखते हैं।
  • सुपर मून (Super Moon): जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे निकट (Perigee) होता है। (आकार बड़ा, चमक ज्यादा)।
  • ब्लू मून (Blue Moon): यह रंग से संबंधित नहीं है। जब एक ही महीने में दो पूर्णिमा हों, तो दूसरी वाली 'ब्लू मून' कहलाती है।
  • ब्लड मून (Blood Moon): पूर्ण चंद्रग्रहण के समय पृथ्वी के वायुमंडल से लाल रंग (लंबी तरंगदैर्ध्य) मुड़कर चंद्रमा पर पड़ता है, जिससे वह तांबे जैसा लाल दिखता है।

2. ग्रहण (Eclipses):

  • सूर्यग्रहण: जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है (अमावस्या को)।
  • चंद्रग्रहण: जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है (पूर्णिमा को)।

खंड 5: अन्य पिंड (Small Bodies)

Small Bodies
  • क्षुद्रग्रह (Asteroids): ये विखंडित ग्रहों के टुकड़े हैं जो मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति के बीच परिक्रमा करते हैं। (जैसे: सेरेस)।
  • कूपर बेल्ट (Kuiper Belt): नेपच्यून के परे बर्फीले पिंडों का एक विशाल क्षेत्र है। प्लूटो इसी बेल्ट का हिस्सा है।
  • धूमकेतु (Comet): इसे 'गंदी बर्फ का गोला' भी कहते हैं। जब यह सूर्य के पास आता है, तो सौर पवन (Solar Wind) के कारण इसकी पूंछ हमेशा सूर्य से विपरीत दिशा में बनती है।
  • उल्का (Meteor) vs उल्कापिंड (Meteorite):
    • अंतरिक्ष में पत्थर = Meteoroid
    • वायुमंडल में जलता हुआ = Meteor (टूटता तारा)
    • धरती पर गिरा हुआ = Meteorite (जिससे क्रेटर बनते हैं, जैसे लोनार झील, महाराष्ट्र)।

UPSC विशेष नोट:

सिविल सेवा परीक्षा में प्रश्न अक्सर "एस्ट्रोसैट", "गगनयान", "आदित्य L-1" (सूर्य मिशन) या "ओसिरिस-रेक्स" (क्षुद्रग्रह मिशन) जैसे करंट अफेयर्स को इन स्थिर अवधारणाओं (Static Concepts) के साथ जोड़कर पूछे जाते हैं।

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