हाल ही में पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" (Operation Epic Fury) के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए लक्षित हवाई हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को गंभीर रूप से अस्थिर कर दिया है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की मृत्यु की खबरों के बाद, ईरान ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए भारी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इस सैन्य टकराव ने न केवल पश्चिम एशिया बल्कि संपूर्ण वैश्विक व्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला के समक्ष एक अभूतपूर्व संकट खड़ा कर दिया है।
वर्तमान तनाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और भू-राजनीतिक कारण
अमेरिका और ईरान के मध्य वर्तमान सैन्य टकराव अचानक उत्पन्न हुई कोई घटना नहीं है, बल्कि यह दशकों पुरानी रणनीतिक और वैचारिक शत्रुता का परिणाम है:
- 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की शत्रुता: 1979 में ईरान में हुई इस्लामी क्रांति के बाद से ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध विच्छेदित हैं। यह कालखंड निरंतर प्रतिबंधों, कूटनीतिक गतिरोध और गहरे वैचारिक संघर्ष से भरा रहा है।
- परमाणु कार्यक्रम का विवाद: वर्ष 2015 में हुए 'संयुक्त व्यापक कार्य योजना' (JCPOA) नामक ऐतिहासिक परमाणु समझौते से 2018 में अमेरिका के एकतरफा वापसी करने और ईरान पर पुनः कठोर आर्थिक प्रतिबंध थोपने के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो गई।
- छद्म युद्ध (Proxy Warfare) और क्षेत्रीय प्रभुत्व: ईरान द्वारा लेबनान, सीरिया, इराक और यमन में हिजबुल्लाह और हमास जैसे सहयोगी समूहों (Non-state actors) को निरंतर वित्तीय और सैन्य समर्थन दिया जाता रहा है। इसके परिणामस्वरूप इजरायल और अमेरिका की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं।
भारत पर इस संकट के बहुआयामी प्रभाव
भारत के लिए पश्चिम एशिया केवल एक ऊर्जा स्रोत नहीं है, बल्कि इसके रणनीतिक हितों का केंद्र है। भारत सरकार इस युद्ध के आर्थिक परिणामों का आकलन करने के लिए निर्यातकों और लॉजिस्टिक क्षेत्र के साथ निरंतर चर्चा कर रही है:
- ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक दबाव: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत का 'चालू खाता घाटा' (CAD) बढ़ सकता है और घरेलू स्तर पर भारी मुद्रास्फीति (महंगाई) प्रेरित हो सकती है।
- व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain): भारत का लगभग 56% वस्तु निर्यात अनिश्चितता के घेरे में है। ओमान के सलालाह और यूएई के जेबेल अली जैसे प्रमुख ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर आवाजाही बाधित होने से समुद्री बीमा लागत और पारगमन समय बढ़ रहा है।
- प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और प्रेषण (Remittances): खाड़ी क्षेत्र में लगभग 80-90 लाख भारतीय निवास करते हैं (कुल प्रवासी कामगारों का 30%)। भारत को प्राप्त होने वाले कुल प्रेषण का 19% केवल UAE से और 7% सऊदी अरब से आता है, जिसकी स्थिरता पर गंभीर संकट है।
- रणनीतिक कनेक्टिविटी परियोजनाएं: इस युद्ध के कारण 'अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा' (INSTC), महत्वाकांक्षी 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा' (IMEC) और 'चाबहार बंदरगाह' के विकास कार्यों पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1: हालिया पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में, 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रणनीतिक महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
- विश्व के कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
- भारत अपने LNG आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 और 3 (D) 1, 2 और 3
व्याख्या: हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह वैश्विक ऊर्जा प्रवाह का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। भारत अपनी 85% LPG और 55% LNG इसी मार्ग से आयात करता है, अतः तीनों कथन सत्य हैं।
प्रश्न 2: पश्चिम एशिया में भारतीय हितों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?
(A) खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में काम करने वाले कुल प्रवासी कामगारों में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 30% है。 (B) भारत को विश्व भर से प्राप्त होने वाले प्रेषण (Remittances) में सर्वाधिक हिस्सा सऊदी अरब का है। (C) भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का लगभग 85% आयात पर निर्भर है。 (D) जेबेल अली (UAE) और सलालाह (ओमान) भारतीय माल ढुलाई के लिए प्रमुख ट्रांसशिपमेंट केंद्र हैं。
व्याख्या: कथन (B) असत्य है। RBI के सर्वेक्षण (2023-24) के अनुसार, खाड़ी देशों में भारत को प्राप्त प्रेषण में सर्वाधिक योगदान संयुक्त अरब अमीरात (19%) का है, जबकि सऊदी अरब का योगदान 7% है।
प्रश्न 3: "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" (Operation Epic Fury) के कारण हाल ही में समाचारों में रहे मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रम के संबंध में निम्नलिखित पर विचार करें:
- 'संयुक्त व्यापक कार्य योजना' (JCPOA) का संबंध मुख्य रूप से इजरायल और फिलिस्तीन के मध्य शांति समझौते से है।
- अमेरिका की सैन्य उपस्थिति केवल तुर्की और इजरायल तक सीमित है।
- हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों को ईरान का समर्थन प्राप्त है जिसे 'प्रॉक्सी वारफेयर' कहा जाता है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (A) केवल 1 (B) केवल 3 (C) केवल 2 और 3 (D) 1, 2 और 3
व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि JCPOA (2015) ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए P5+1 देशों और ईरान के बीच का समझौता था। कथन 2 गलत है क्योंकि अमेरिका की सैन्य उपस्थिति मध्य पूर्व के कई देशों (कुवैत, कतर, बहरीन, यूएई आदि) में है। केवल कथन 3 सही है।
मुख्य परीक्षा हेतु वर्णनात्मक अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1: "पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य टकराव भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए एक गंभीर बहुआयामी चुनौती प्रस्तुत करता है।" इस कथन के प्रकाश में, भारत पर पड़ने वाले प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें और संभावित नीतिगत उपायों का सुझाव दें।
संक्षिप्त उत्तर रूपरेखा (Short Answer Summary):
- आर्थिक प्रभाव: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से आयात बिल में वृद्धि, मुद्रास्फीति का बढ़ना, और चालू खाता घाटे (CAD) पर दबाव पड़ेगा। भारत का 56% वस्तु निर्यात अनिश्चितता के घेरे में आ जाएगा।
- ऊर्जा सुरक्षा: हॉर्मुज जलडमरूमध्य के अवरुद्ध होने से भारत की 85% LPG और 55% LNG आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है।
- प्रवासी और प्रेषण: 80-90 लाख भारतीयों की सुरक्षा संकट में है। यूएई (19%) और सऊदी अरब (7%) जैसे देशों से आने वाले प्रेषण (Remittances) में भारी कमी आ सकती है।
- सुझाव: भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लानी चाहिए। रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) का विस्तार करना चाहिए, प्रवासियों की सुरक्षित निकासी के लिए 'कंटिंजेंसी प्लान' तैयार रखना चाहिए और सभी पक्षों के साथ संतुलित कूटनीतिक संवाद स्थापित करना चाहिए।
प्रश्न 2: अमेरिका और ईरान के मध्य हालिया 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और उसके बाद उत्पन्न हुए संघर्ष के मूल कारणों की विवेचना करें। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसके क्या निहितार्थ हो सकते हैं?
संक्षिप्त उत्तर रूपरेखा (Short Answer Summary):
- मूल कारण: यह संघर्ष 1979 की ईरानी क्रांति से उत्पन्न वैचारिक शत्रुता का परिणाम है। 2018 में JCPOA (परमाणु समझौते) से अमेरिका के एकतरफा बाहर निकलने के बाद अविश्वास बढ़ा। इसके अलावा, ईरान द्वारा हिजबुल्लाह और हमास के माध्यम से चलाया जा रहा 'छद्म युद्ध' (Proxy war) अमेरिका और इजरायल के लिए सीधा सुरक्षा खतरा बन गया है।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निहितार्थ: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (जहाँ से 20% वैश्विक तेल व्यापार होता है) के बंद होने के खतरे से ऊर्जा की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। समुद्री असुरक्षा के कारण माल की आवाजाही लंबे मार्गों से करनी पड़ सकती है, जिससे परिवहन समय और बीमा लागत में अत्यधिक वृद्धि होगी, जो अंततः वैश्विक रसद (Logistics) नेटवर्क को धीमा कर वैश्विक मुद्रास्फीति को बढ़ाएगी।




